डांट के डर से घर से भागे 11 वर्षीय बालक को सनावद पुलिस ने 3 घंटे में खोजा, परिजनों को सौंपा बकरी चराने के दौरान टूट गई थी दोस्त की साइकिल, सहम कर आश्रम चला गया था मासूम
सनावद (खरगोन)।
पुलिस की तत्परता और संवेदनशीलता के कारण एक बार फिर एक परिवार की खुशियां लौटने का मामला सामने आया है। सनावद पुलिस ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज होने के महज 3 घंटे के भीतर 11 वर्षीय लापता बालक को सकुशल दस्तयाब कर उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया। बालक की सुरक्षित घर वापसी पर भावुक परिजनों ने पुलिस टीम का सहृदय आभार व्यक्त किया है।
क्या था पूरा मामला?
पुलिस के अनुसार, 14 जून को फरियादिया कस्तुरीबाई (निवासी खानखा मस्जिद के पास, सनावद) ने थाने आकर सूचना दी कि उनका 11 वर्षीय नाती कृष्ण बकरी चराने के लिए घर से निकला था, लेकिन वापस नहीं लौटा। परिजनों ने अपने स्तर पर तलाश की, लेकिन कोई सुराग न मिलने पर लापता होने के करीब 24 घंटे बाद पुलिस की शरण ली। मामले की गंभीरता को देखते हुए सनावद पुलिस ने तत्काल धारा 137(2) बीएनएस के तहत अपराध क्रमांक 244/2026 दर्ज कर बालक की तलाश शुरू की।
CCTV फुटेज और नाविक की सूचना आई काम
पुलिस अधीक्षक रविन्द्र वर्मा एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) शकुन्तला रुहल के निर्देशन में थाना प्रभारी उपनिरीक्षक धर्मेन्द्र यादव के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। पुलिस टीम ने बालक की फोटो लेकर संभावित ठिकानों पर सर्चिंग शुरू की और क्षेत्र के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगाले। फुटेज में बालक बड़वाह की ओर जाता दिखाई दिया।
इस सुराग के आधार पर पुलिस टीम तत्काल बड़वाह और खेड़ी घाट पहुंची। इसी दौरान नावघाट खेड़ी पर नाविक अर्जुन केवट के माध्यम से सूचना मिली कि उक्त बालक वहाँ मौजूद है। पुलिस ने बिना वक्त गंवाए त्वरित कार्रवाई करते हुए बालक को अपनी अभिरक्षा में ले लिया।
क्यों भागा था मासूम?
पुलिस की पूछताछ में 11 वर्षीय कृष्ण ने बताया कि जब वह बकरी चराने गया था, तो उससे गोविन्द नाम के व्यक्ति की साइकिल खराब (टूट) गई थी। उसे डर था कि इस बात का पता चलने पर उसकी नानी उसे डांटेगी। इसी डर के कारण वह बस में बैठकर खेड़ी घाट आ गया और नर्मदा नदी स्थित एक आश्रम में रात बिताई।
सराहनीय भूमिका
इस त्वरित और सफल रेस्क्यू ऑपरेशन में एसडीओपी बड़वाह श्रीमती अर्चना रावत के मार्गदर्शन व थाना प्रभारी उनि. धर्मेन्द्र यादव के नेतृत्व में सउनि चम्पालाल सोलंकी, प्रधान आरक्षक गंभीर मीणा, राजेन्द्र चौहान, आरक्षक राजीव, कृष्णा, सुनील, जितेन्द्र जाट, सरदार निगम, योगेश, कैलाश, गजेन्द्र और रघुविर सहित सनावद थाने के स्टाफ की सराहनीय भूमिका रही।