चुनावी रण से मीनाक्षी नटराजन बाहर: ‘तकनीकी पेंच’ या ‘सियासी घेराबंदी’? खरगोन में कांग्रेस की दहाड़— ‘नामांकन निरस्त होना लोकतंत्र का काला अध्याय’, कानूनी लड़ाई की तैयारी
खरगोन। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किए जाने के विरोध में प्रदेशभर में जिला स्तर पर पत्रकार वार्ताओं का आयोजन किया गया। इसी क्रम में खरगोन में आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने इस निर्णय को लोकतांत्रिक प्रक्रिया, निष्पक्ष चुनाव व्यवस्था और संवैधानिक मूल्यों पर गंभीर आघात बताते हुए इसकी कड़ी आलोचना की।
तकनीकी आधार पर विपक्ष को बाहर करने की साजिश: जय सिंह ठाकुर
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव एवं खरगोन प्रभारी जय सिंह ठाकुर ने कहा:
”राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार श्रीमती मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किया जाना केवल एक उम्मीदवार के साथ अन्याय का मामला नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर गंभीर प्रहार है। जिस प्रकार की आपत्तियों और व्याख्याओं के आधार पर उनका नामांकन निरस्त किया गया, उससे पूरे देश में चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि मीनाक्षी नटराजन जैसी साफ-सुथरी छवि, वैचारिक प्रतिबद्धता और जनसेवा के लिए समर्पित नेता को चुनावी प्रक्रिया से बाहर किया जाना लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध और लोकतंत्र के इतिहास का ‘काला अध्याय’ है।
कानूनी प्रावधानों का गलत इस्तेमाल
कांग्रेस नेतृत्व (प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, वरिष्ठ अधिवक्ता व सांसद डॉ. विवेक तन्खा और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी) की ओर से यह प्रश्न उठाया गया है कि चुनावी प्रक्रिया कानून के अनुरूप संचालित होगी या राजनीतिक दबावों के।
कांग्रेस ने अपनी प्रेस वार्ता में मुख्य रूप से दो कानूनी बिंदु उठाए:
अभियुक्त बनाम प्रतिवादी: जिस निजी परिवाद (प्राइवेट कम्प्लेंट) का उल्लेख किया गया है, उसमें श्रीमती मीनाक्षी नटराजन को अभियुक्त (Accused) नहीं बल्कि प्रतिवादी (Respondent) के रूप में दर्शाया गया है। दोनों की कानूनी स्थिति अलग होती है, लेकिन दोनों को समान मानकर गलत व्याख्या की गई।
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 33ए: फॉर्म-26 का उद्देश्य उन आपराधिक मामलों की जानकारी प्राप्त करना है, जिनमें विधिवत आपराधिक कार्यवाही चल रही हो। जिस आधार पर नामांकन निरस्त हुआ, वह इन प्रावधानों की भावना से मेल नहीं खाता।
कांग्रेस का मानना है कि यदि विपक्षी दलों के उम्मीदवारों को तकनीकी और विवादित आधारों पर चुनावी मैदान से बाहर किया जाने लगा, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता समाप्त हो जाएगी।
पत्रकार वार्ता में यह रहे उपस्थित
इस महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता के दौरान जिला कांग्रेस संगठन महासचिव जितेंद्र भावसार, जिला उपाध्यक्ष कादर बेग, युवा नेता विनोद यादव, ब्लॉक यूथ कांग्रेस अध्यक्ष विक्रम यादव, पार्षद अरुणा उपाध्याय, श्रीमती सरिता चौहान, अजा प्रकोष्ठ प्रदेश महासचिव संजीव गांगुली, वरिष्ठ कांग्रेस नेता डेविड बैनार्ड, वरिष्ठ कांग्रेस नेता राजेंद्र सिंह पवार, युवा नेता अरविंद, आवेश खान और लालू भावसार सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।